Friday, 21 September 2018

Anurag

अनुराग,आज हम सब का मन बेबस है
पता नही इसे तेरे जाने का गम है या तेरे बिन
monday से नई शुरुवात का ।

डर है तेरे बिना MSC की समस्याएं कैसे सुलझेगी,
डर है subfile se,डर है pointers से और बहुत कुछ है डरने के लिए
सबसे बड़ा डर है खुद की बचकानी doubts से,
अब तो बस डर है डर से।😉

पर हाँ, इतना भी डर नही।
तुमने अनजाने में काफी कुछ सीखा दिया है
और शायद हम उनसे कुछ और दिन आराम से निकाल ले यहां।

जाते जाते बस हम सब की तरफ से एक शुक्रिया लेता जा
रास्ते के हर पड़ाव पर खड़े रहने के लिए
लड़खराने पर सहारा देने के लिए,
काम को मजे में करने को सिखाने के लिए।

हम सब तेरी कमी महसूस करेंगे और वो तेरा copyright डॉयलोग(s)'भैंस की आंख'
शायद ही हम में से कोई भूल पाएं।

ऐसे ही हस्ते और हँसाते रहना हमारे दोस्त।

जहाँपनाह तुस्सी GREAT हो !!

-तुम्हारे कलिंगा के दोस्त