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| Soul at peace |
आज मन बेचैन है
पता नहीं कहाँ जाना चाहता है
आसमान में उड़ना चाहता है
या समुद्र में गोते लगाना
इतना अस्पस्ट न जाने क्यों है
पता नहीं क्या चाहता है
रास्ते तय करना चाहता है
या रुख बदलना
पता नहीं क्या चाहता है
रास्ते तय करना चाहता है
या रुख बदलना
कोई संकेत भी न नजर आ रहा
पता नहीं क्या चाहता है
किसी ख़ास से बातें करना चाहता है
या चुप्पी साधना
पता नहीं क्या चाहता है
किसी ख़ास से बातें करना चाहता है
या चुप्पी साधना
इतनी उधेड़बुन में है
मानो आइंस्टीन
की थेओरी ऑफ़ रिलेटिविटी
तैयार कर रहा हो
मानो आइंस्टीन
की थेओरी ऑफ़ रिलेटिविटी
तैयार कर रहा हो
इन्द्रियों ने अभी अभी
अनुमान लगाया है कि
ज्यादा कुछ नहीं
ये मन बस अपनी अस्तित्व का
एहसास दिलाना चाहता है
अनुमान लगाया है कि
ज्यादा कुछ नहीं
ये मन बस अपनी अस्तित्व का
एहसास दिलाना चाहता है

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